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तृतीयपंथियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी – डॉ. व्यवहारे

सामाजिक न्याय विभाग एवं सप्तरंगी सेवाभावी संस्था के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन

चंद्रपुर, 26 अक्टूबर। तृतीयपंथी समुदाय भी समाज का अभिन्न अंग है। उन्हें केवल सहानुभूति की दृष्टि से देखने के बजाय समान अधिकारों वाले नागरिक के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। तृतीयपंथियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए प्रशासन के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान आवश्यक है। यह प्रतिपादन अपर जिलाधिकारी डॉ. नितीन व्यवहारे ने किया।

नियोजन भवन में सोमवार को सामाजिक न्याय विभाग, चंद्रपुर तथा सप्तरंगी सेवाभावी संस्था, नांदेड़ के संयुक्त तत्वावधान में तृतीयपंथियों के अधिकारों एवं कल्याण से संबंधित विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. व्यवहारे संबोधित कर रहे थे। मंच पर अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे, सहायक आयुक्त (समाज कल्याण) विनोद मोहतुरे, सप्तरंगी सेवाभावी संस्था की अध्यक्ष तथा तृतीयपंथी कल्याण महामंडल की सह-अध्यक्ष डॉ. सान्वी जेढवाणी और तृतीयपंथी समुदाय के प्रतिनिधि राज एवं साजन उपस्थित थे।

डॉ. व्यवहारे ने कहा कि तृतीयपंथियों के अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं महत्वपूर्ण हैं। शासन ने तृतीयपंथी व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान किए हैं तथा उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने तृतीयपंथी समुदाय के लोगों से आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पंजीकरण जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

उन्होंने बताया कि शासन ने तृतीयपंथियों के कल्याण के लिए स्वतंत्र महामंडल की स्थापना की है। इसके माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेने के लिए समुदाय के लोगों को आगे आना चाहिए। साथ ही, समाजकार्य के विद्यार्थियों को तृतीयपंथियों के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए जनजागृति अभियान चलाना चाहिए।

तृतीयपंथियों को शिक्षा, रोजगार और समान अवसर देना जरूरी – डॉ. सान्वी जेढवाणी

मुख्य मार्गदर्शक डॉ. सान्वी जेढवाणी ने कहा कि तृतीयपंथी समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा है। उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, रोजगार हासिल करने और समान अवसर पाने का अधिकार है। इसके बावजूद आज भी समाज में उन्हें भेदभाव और पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। तृतीयपंथियों के प्रति लोगों की सोच बदलना और उन्हें समान नागरिक के रूप में स्वीकार करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आज भी कई तृतीयपंथी व्यक्ति रेलवे स्टेशनों, टोल नाकों और सार्वजनिक स्थानों पर अपना जीवनयापन करते दिखाई देते हैं। इस समुदाय को मुख्यधारा से दूर रखने के बजाय शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

डॉ. जेढवाणी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक नालसा (NALSA) फैसले के बाद तृतीयपंथियों की स्वतंत्र पहचान को कानूनी मान्यता मिली और उनके अधिकारों के संरक्षण को मजबूती मिली। उन्होंने समुदाय के लोगों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि बीज पूंजी योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने तृतीयपंथियों के लिए उच्च शिक्षा निःशुल्क की है। प्रत्येक जिले में संरक्षण कक्ष स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है।

तृतीयपंथियों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन प्रतिबद्ध – ईश्वर कातकडे

अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे ने कहा कि तृतीयपंथी समुदाय के प्रति समाज की पारंपरिक सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है। इस समुदाय को लंबे समय तक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ा है। हालांकि, अब स्थिति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और पुलिस भर्ती जैसे क्षेत्रों में भी तृतीयपंथियों के लिए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तृतीयपंथी व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय, उत्पीड़न या परेशानी होने पर वे आपातकालीन सहायता के लिए 112 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। उनकी समस्याओं के समाधान और सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम का प्रास्ताविक समाज कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त विनोद मोहतुरे ने किया, जबकि संचालन सचिन फुलझेले ने किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में तृतीयपंथियों के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित पुस्तिका का मान्यवरों के हाथों विमोचन किया गया।